हमारे देश में प्रतिभा कदम-कदम पर नजर आती है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में वह प्रतिभा अक्सर किसी कोने में दम तोड़ देती है। कुछ ऐसा ही हाल राष्ट्रीय हैंडबॉल चैंपियन विकास कुमार पांडेय का है, जो चार बार झारखंड की टीम का हिस्सा बन चुके हैं।
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